जन के पथ की-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

जन के पथ की-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

जन के पथ की
खबर खरी हो,
साँची हो,
बानी-बोली
प्राणवंत हो,
बाँकी हो,
मानववादी
सोच-समझ की साखी हो,
लोकतंत्र की
सत्यालोकित आँखी हो।

रचनाकाल: ०४-०४-१९९१

 

Leave a Reply