जनता-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

जनता-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

 

डर तो उनको भी लगता है

सब कुछ तो हैं उनके पास
सत्ता की ताक़त
राजनीति की ताक़त
कूटनीति की ताक़त

और उससे भी बढ़कर

धर्म की ताक़त
जात-पात की ताक़त
ऊँच-नीच की ताक़त
बड़े-छोटे की ताक़त

वो अपने आप को शिक्षित मानते है
विद्वान मानते है
सभ्य मानते है
बुद्धिजीवी मानते है

और हाँ उनके पास
सेना, पुलिस और मिलिट्री है
गोली और उसको चलाने के लिए बंदूक़ भी है
अरे हाँ ! उनके पास टैंक और तोप भी तो है
रौंदने के लिए
हमारे अधिकारो को
हमारे हक़ को
हमारी आवाज़ को
हमारे जज़्बे को
और हमारी आज़ादी को!

लेकिन फिर भी उनको डर लगता है
क्योंकि उनको पता है
किसी भी दिन
यह अनपढ़, नासमझ, डरपोक
भूखे, नंगे, ग़रीब
उठ खड़े होंगे

क्योंकि डरने की भी एक हद होती है
एक सीमा होती है
एक मर्यादा होती है!

 

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