जंगल में-अपने खेत में -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

जंगल में-अपने खेत में -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

जंगल में
लगी रही आग
लगातार तीन दिन, दो रात
निकटवर्ती गुफावाला
बाघ का खानदान
विस्थापित हो गया

उस झरने के निकट
उसकी गुफा भी
दावानल के चपेट में
आ गई थी…
वो अब किधर
भटक रहा होगा ?
रात को निकलता होगा
पूर्ववत्…

बाघिन बेचारी
अपने दोनों बच्चों पर
रात-दिन पहरा देती होगी
मध्य रात्रि में
आस पास की झाड़ियों के
चक्कर लगा आती होगी
जरूर ही जल्द वापस होती होगी
वात्सल्य क्या
उस गरीब का
स्थायी भाव न होगा
बाघ लेकिन
सारा-सारा दिन
वापस न आता होगा
हाँ, शिकार पा जाने पर
फौरन लौटता होगा बाघ !

(5.6.85)

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