छोटी छोटी कविताएँ-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

छोटी छोटी कविताएँ-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

कोई भी काम
कर्तव्य बन जाता है उसी क्षण
जब हमें लगता है कि
वह उस निष्ठा का अंग है
जो जीवन के पहले क्षण से
हमारे संग है.
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हमारा सब कुछ
अपनी-अपनी जगह हो
तभी समझ सकते हैं
हम इतनी छोटी बात भी
जैसे एक और एक दो
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अपने प्रति सख्त बनो
जिससे नरम बन सको
दूसरों के प्रति
अच्छी है अति यहीं
और कहीं नहीं
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खुल जाएँ अगर दृष्टि के द्वार
तो दिखने लगे सब कुछ
आँखों के सामने वैसा ही
जैसा वह है अनंत याने
तब फिर न दौड़ें
-फिरें हम कुछ भी पाने.
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जो जितना ऊंचा चढ़ता है
उतना साबित कदम बनाना पड़ता है उसको
मौत का सबब बन सकती है एक पल मे
ऊंचाई पर लापरवाही

 

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