छेड़नी है हिन्द में हक़ की लड़ाई-विकास कुमार गिरि -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vikas Kumar Giri 

छेड़नी है हिन्द में हक़ की लड़ाई-विकास कुमार गिरि -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vikas Kumar Giri

छेड़नी है हिन्द में हक़ की लड़ाई
फिर से हो जाओ एक हिन्दू, मुस्लिम,सिख,ईसाई
किसी के बहकावे में हम नहीं आएंगे भाई
अब हम नहीं करेंगे कभी भी लड़ाई

बहुत हुई जाति, धर्म और मज़हब के नाम पर लड़ाई
राजनीती करने वाले और दूसरे मुल्कों ने
हमें लड़ा के हम लोगो में दूरियां बढ़ाई
अब हम मिलकर रहेंगे अपने हक़ के लिए लड़ेंगे
क्योंकि बहुत सही हमने जुदाई
अब हम नहीं करेंगे कभी भी लड़ाई

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई

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