छूटा जो तेरा साथ-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

छूटा जो तेरा साथ-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

अभी अभी जो मेरे हाथ से छूटा है
वो तेरा हाथ ।
जैसे विस्मृत हुई सांसें, टूटा है रूह
का साथ ।

अधूरे जीवन की आहट रोम रोम
तक सहमी है ।
तेरी कमी, तू मुझमें अन्तिम सांस
तक रहनी है ।
जैसे धड़कन भी भूली है सांसों से
करना बात ।
अभी अभी जो मेरे हाथ से छूटा है
वो तेरा हाथ ।

उस डाली के संग घरोंदा मेरा भी
टूटा है ।
तेरा रब तुझ संग मेरी किस्मत से
भी रुठा है ।
कराहते हैं दिन मेरे और डर कर
आती है रात ।
अभी अभी जो मेरे हाथ से छूटा है
वो तेरा हाथ ।

तुम भी तो अश्रुधारा में रोज बह
जाती हो ।
तुम भी बिलख कर तन्हा मौन रह
जाती हो ।
तुम्हारे भी तो स्वपन हैं अधूरे छोड़
मेरा साथ ।
अभी अभी जो मेरे हाथ से छूटा है
वो तेरा हाथ ।

जग सूना, जीवन खाली, कायनात
अधूरी है ।
किस्सा अधूरा, हम भी अधूरे,
बात अधूरी है ।
जैसे सावन भी भूल गया है करना
बरसात ।
अभी अभी जो मेरे हाथ से छूटा है
वो तेरा हाथ ।।

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