छाँव वही धूप वही, दुल्हिन का रूप वही-रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Roopchandra Shastri Mayank 

छाँव वही धूप वही, दुल्हिन का रूप वही-रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Roopchandra Shastri Mayank

छाँव वही धूप वही
दुल्हिन का रूप वही
उपवन मुस्काया है!
नया-गीत आया है!!

सुबह वही शाम वही
श्याम और राम वही
रबड़-छन्द भाया है!
नया-गीत आया है!!

बिम्ब नये व्यथा वही
पात्र नये कथा वही
माथा चकराया है!
नया-गीत आया है!!

महकी सुगन्ध वही
माटी की गन्ध वही
थाल नव सजाया है!
नया-गीत आया है!!

सूखा आषाढ़ है
भादों में बाढ़ है
कुहरा गहराया है!
नया-गीत आया है!!

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