छलनार नामगन्ध नेइ (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun 

छलनार नामगन्ध नेइ (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

प्रीति स्निग्ध, बुद्धि दीप्त, जोड़ा चोख एइ
एखाने तो छलनार नाम गन्ध नेइ
सुठाम सुविस्तृत कपाले सिन्दूरी गोलक
नासाग्रे दुलछे कलित लघु कनक लोलक
तोमार ध्याने सेरे जाय माथा व्यथा
स्फुरित हये थाके अन्तरे रूप कथा

कोथाय छिलि तुइ आमार तिलोतमे
भूलिनि तो कखनो तोमाके सुमध्य मे
प्रीति स्निग्ध बुद्धि दीप्त जोड़ा चोख एइ
एखाने तो छलनार नाभ गन्ध नेइ

(13.7.78)

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