छन छन चलती थी तलवारें-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

छन छन चलती थी तलवारें-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

छन छन चलती थी तलवारें,
जिससे अकबर घबराता था।
चेतक को घोड़ा कहते हो
वो हवा में उड़ जाता था।।

सिंह की भांति गरजते राणा का
भाला बिजली सा चलता था।
कटकर धड़ ऐसे गिरता ,
जैसे हवा में पत्ता उड़ता था।
चेतक के टापो की आवाज़ों से
बीरो का बल बढ़ जाता था।
आये चाहे जितने बहलोल
घोड़े समेत कट जाता था।

जिस ओर नजर हो राणा की,
इतिहास गढ़ा ही जाता था।
छन छन चलती थी तलवारें,
जिससे अकबर घबराता था।

इतिहास पढ़ा होगा तो लिखता हूं
वह सबका अनुयाई था।
भीलों और प्रजा को लेकर
लड़ता स्वमं लड़ाई था।
जिसने आधे भारत के बदले
धास की रोटी खाई थी।
लिंकन के मां को भी
उस बीर की मिट्टी भायी थी।

बीरता के कंधे पर चढ़कर
जो भारत मां को बचाता है।
सैनिक हो या आम आदमी
राणा कहा ही जाता है।।

स्वाभिमान तुम कुछ कह लो
मैं तुमको राणा लिखता हूं।
भष्ट्र सिंघासन पर तू है।
मैं तेरा नाम बदलता हूं।।
जबतक किताबों में राणा का
स्वाभिमान न उतारा जायेगा।
कोरे कागज़ पर कुछ भी लिख लो
राणा लिखा न जायेगा।।

कभी पलटना पन्नो को,
पूछो क्यो रोता जाता था।
छन छन करती थी तलवारें
जिससे अकबर घबराता था।

जिसका नाम सुनते ही
मुगलिया फौज हिल जाती थी।
लेते ही नाम महाकाल का,
धरती में मिल जाती थी।
जिसके हाथी को झुका न सका
उस राणा को क्या झुकायेगा।
अकबर मरने से अच्छा है
युद्ध लड़ने न जायेगा।।

रामप्रसाद वो हाथी था
जो राणा पर इतराता था।
अकबर लाख जतन कर लें
वह अपना धर्म निभाया था।।

इसे गीत मत समझना कभी
राजपूती खून की कहानी है।
दो कुंतल से सजा हुआ था
अमर उसकी निशानी है।।
तुम इसको कविता कह लो।
मैं राणा का शौर्य लिखता हूं।
जलते हुए उस सूरज को
भारत का गौरव लिखता हूं।।
मेवाड की उस माटी को
माथे का चन्दन लिखता हूं।
जिस मां ने तुझको जन्म दिया था
उसको वंदन लिखता हूं।।

राणा का लड़ा हुआ युद्ध
महाभारत कहा जाता था।
चेतक को घोड़ा कहते हो।
वह हवा में उड़ जाता था।

 

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