चेहरे पर उतरता वसंत-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

चेहरे पर उतरता वसंत-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

अखबार में
एक खबर छपी थी
कि वसंत आने वाला है

अब वसंत तो
किसी भी रास्ते आ सकता है

इसलिए मैंने घर के सारे
खिड़की दरवाजे खोल दिये

क्या पता
जाने किस ओर से
वसंत का प्रवेश हो

शायद उस खिड़की से
जिसकी तरफ से
गांव की पगडंडी आती थी

या फिर उस दरवाजे से
जिधर से पक्की सड़क
शहर को जाती थी

रोज सुबह से शाम
मैं इंतजार करता रहा
वसंत और उसके आगमन का

और आप अचरज करेंगे
कि एक रोज सुबह
जब मैं सोकर उठा
तो मैंने पाया कि
वसंत आ चुका है
दबे पांव चुपचाप बिना हो हल्ला किये

उसके चिन्ह हर तरफ दिख रहे हैं
चेतन अचेतन दोनों में

हवा मादक गंध बिखेर रही है

सुबह की सैर में
कुछ अलग ही नजारा था

फूलों के चटक रंग
आकर्षण की अलग ही कहानी कह रहे थे

परागकण रस से सराबोर हो
नव ऊर्जा से भरे भौरों से
अठखेलियां कर रहे थे

शाखायें मदहोशी से लहरा रही थी
फुनगियां नयेपन से इठला रही थी

मानो ज़र्रे ज़र्रे में वसंत उतर आया हो
और धरती के समानांतर सुस्ता रहा हो

फूल, पत्ती, पशु, पक्षी
सब पर वसंत दिखा

बस नहीं दिखा तो वो सिर्फ
मनुष्य के चेहरे पर

हालांकि
मेरी प्रबल इच्छा थी.. कि

वसंत को मानव के चेहरे पर भी
उतरता हुआ देखूं..!!

 

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