चुप चाप घर से चल दिया -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

चुप चाप घर से चल दिया -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

चुप चाप घर से चल दिया फ़िर वुह नमक हराम ।
पहुंचा वुह इस जगह पि मोरिंडा था जिस का नाम ।
मुख़बिर वहां नवाब के रखते थे कुछ क्याम ।
ख़ुफ़िया कुछ उन से करने लगा बदसयर कलाम ।
मतलब था जिस का, घर मिरे सतिगुर के लाल हैं ।
जिन के पकड़ने के सभी ख़ाहां कमाल है ।

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