चिल्लाए बाज़्ज़ लो वुह -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

चिल्लाए बाज़्ज़ लो वुह -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

चिल्लाए बाज़्ज़ लो वुह दया सिंह जी बढ़े ।
खांडा पकड़ के हाथ में जीवत बली बढ़े ।
सतिगुर के बाग़ के हैं येह सरवे-सही बढ़े ।
लाशों के पाटने को सफ़र जन्नती बढ़े ।
इन सा दिलेर कोई नहीं है सिपाह में ।
सर नज़र कर चुके हैं, येह मौला की राह में ।

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