चिट्ठी आयी थी-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

चिट्ठी आयी थी-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

 

एक दिन चाँदनी रात की
श्वेत चमक निहार रही थी
और बैठी बैठी सोच रही थी
कोई पेंसिल से पन्ने पर
खींच देता एक लकीर
और पास आकर कहता
देखो ये है तुम्हारी तस्वीर
वह हकीकत किसी
जन्नत से कम नहीं होती
मेरी निगाहों में प्रेम की
बरसात होती और
उसकी हर बूँद
वो गिन लेते
भर लेते किसी घड़े में
और
मेरी हर भंगिमाओं को
काश उस लकीर में कैद करते
और कहते सुनों
मेरी खींची एक लकीर
तुम्हारी तस्वीर के साथ ही
एक राग है
जिसे मैं संगीत की तरह
गुनगुनाता हूँ
महसूस करता हूँ
लकीर के रूप में
तुम्हारी हर आकृति
अपने भीतर समेटता हूँ
समा जाता हूँ
और चाँदनी जब डूब जाती है
मेरी आँखे उससे दूर जाती है
तब पता चलता है
जो अब तक हकीकत
की दुनियाँ में तैर रही थी
वह एक चिट्ठी भर थी
और शब्दों में बँधकर
रह गयी थी
मेरी हकीकत
पन्ने और स्याही के बीच
सिमटकर रह गयी थी

 

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