चिकने घड़े-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

चिकने घड़े-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

गरीबों के घड़े
सूखे पड़े हैं,
हम उन्हें मितव्ययी
बनाने पर अड़े हैं,
कौन पचड़े में पड़े
नेता सारे
चिकने घड़े हैं।

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