चिंता में मत तू जल जाना।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

चिंता में मत तू जल जाना।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

चलता हरदम अंगारों पर
शोकाकुल, भय- अम्बारों पर,
रुज, पीड़ा के भँवर बीच तू
रथ जीवन का रहा खींच तू।
खलता वय का यूँ ढल जाना।
चिंता में मत तू जल जाना।

अनजानी विपदा में रत है
कितनी बुरी, भयानक लत है,
चेहरे पर रखता तनाव तू
मार कुल्हाड़ी रहा पाँव तू।
सोच-सोच तन का गल जाना
चिंता में मत तू जल जाना।

जीवन जो यदि दुख का सागर
सुख भी देता नटवर – नागर,
गिरे हुए को वही उठाता
दामन में मोती बरसाता।
सूखे तरु का भी फल जाना
चिंता में मत तू जल जाना।

 

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