चार वरन चार मझहबां जग विच हिन्दू मुसलमाने ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

चार वरन चार मझहबां जग विच हिन्दू मुसलमाने ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चार वरन चार मझहबां जग विच हिन्दू मुसलमाने ॥
खुदी बकीली तकब्बरी खिंचोतान करेन धिङाने ॥
गंग बनारस हिन्दूआं मक्का काबा मुसलमाने ॥
सुन्नत मुसलमान दी तिलक जंञू हिन्दू लोभाने ॥
राम रहीम कहायन्दे इक नाम दुइ राह भुलाने ॥
बेद कतेब भुलायकै मोहे लालच दुनी शैताने ॥
सच्च किनारे रह गया खह मरदे बामन मउलाने ॥
सिरों न मिटे आवन जाने ॥21॥

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