चार फुलझड़ियाँ-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

चार फुलझड़ियाँ-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

रूप

सफ़ेद खादी में
लक्ष्मी का रंग काला
उनकी दीवाली में
देश का दीवाला

किस्मत

दीवाली में
फाकाकशी का
दौर चल रहा है
दिया किस्मत वाला है
जो घी से
जल रहा है

नेता

देश के लिए
भारी है
इच्छाधारी है

नसीब

डेयरी के मज़दूर का
कैस नसीब है
पाँचों उँगलियाँ
घी में
फिर भी गरीब है।

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