चार जुग कर थापना सतिजुग त्रेता दुआपुर साजे ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

चार जुग कर थापना सतिजुग त्रेता दुआपुर साजे ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चार जुग कर थापना सतिजुग त्रेता दुआपुर साजे ॥
चौथा कलजुग थाप्या चार वरन चारों के राजे ॥
बहमन छत्री वैश सूद्र जुग जुग एको वरन बिराजे ॥
सतिजुग हंस अउतार धर सोहम्ब्रहम न दूजा पाजे ॥
एको ब्रहम वखाणीऐ मोह मायआ ते बेमुहताजे ॥
करन तपस्सया बन विखे वखत गुजारन पिन्नी सागे ॥
लख वर्हआं दी आरजा कोठे कोट न मन्दर साजे ॥
इक बिनसे इक असथिर गाजे ॥5॥

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