चारा-गर भी जो यूँ गुज़र जाएँ-नज़्में-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

चारा-गर भी जो यूँ गुज़र जाएँ-नज़्में-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

चारा-गर भी जो यूँ गुज़र जाएँ
चारा-गर भी जो यूँ गुज़र जाएँ
फिर ये बीमार किस के घर जाएँ

आज का ग़म बड़ी क़यामत है
आज सब नक़्श-ए-ग़म उभर जाएँ

है बहारों की रूह सोग-नशीं
सारे औराक़-ए-गुल बिखर जाएँ

नाज़-पर्वर्दा बे-नवा मजबूर
जाने वाले ये सब किधर जाएँ

कल का दिन हाए कल का दिन ऐ ‘जौन’
काश इस रात हम भी मर जाएँ

है शब-ए-मातम-ए-मसीहाई
अश्क दामन में ता-सहर जाएँ

मरने वाले तिरे जनाज़े में
क्या फ़क़त हम ब-चश्म-तर जाएँ

काश दिल ख़ून हो के बह जाए
काश आँखें लहू में भर जाएँ

Leave a Reply