चाय बख़शीं रब्बा मेरे कीते नूं-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

चाय बख़शीं रब्बा मेरे कीते नूं-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

चाय बख़शीं रब्बा मेरे कीते नूं ।१।रहाउ।

अउगुण्यारी नूं को गुन नाही
लाज पई तउ मीते नूं ।१।

दामनु लग्ग्यां दी सरमु तुसानूं
घति डोरी मेरे चीते नूं ।२।

तउ बिनु दूजा द्रिसटि न आवै
ढाह भरम दे भीते नूं ।३।

शेख़ शरफ़ हाल कैनूं आखां
उमरि गई निसि बीते नूं ।४॥

(बिलावलु)

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