चादना चादनु आंगनि-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

चादना चादनु आंगनि-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

चादना चादनु आंगनि प्रभ जीउ अंतरि चादना ॥१॥
आराधना अराधनु नीका हरि हरि नामु अराधना ॥२॥
तिआगना तिआगनु नीका कामु क्रोधु लोभु तिआगना ॥३॥
मागना मागनु नीका हरि जसु गुर ते मागना ॥४॥
जागना जागनु नीका हरि कीरतन महि जागना ॥५॥
लागना लागनु नीका गुर चरणी मनु लागना ॥६॥
इह बिधि तिसहि परापते जा कै मसतकि भागना ॥७॥
कहु नानक तिसु सभु किछु नीका जो प्रभ की सरनागना ॥8॥1॥4॥1018॥

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