चहुं बेदां के धरम मथ खट शासत्र मथ रिखी सुनावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

चहुं बेदां के धरम मथ खट शासत्र मथ रिखी सुनावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चहुं बेदां के धरम मथ खट शासत्र मथ रिखी सुनावै ॥
ब्रहमादिक सनकादिका ज्यु तेह कहा तिवें जग गावै ॥
गावन पड़न बिचार बहु कोटि मधे विरला गति पावै ॥
इह अचरज मन आंवदी पड़्हत गुड़्हत कछु भेद न आवै ॥
जुग जुग एको वरन है कलजुग किवें बहुत दिखलावै ॥
जन्द्रे वजे त्रेहु जुगीं कथ पड़्ह रहै भरम नहं जावै ॥
ज्यों कर कथ्या चार वेद खट शासत्र संग सांख सुणावै ॥
आपो आपने सब मत गावै ॥8॥

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