चलो प्यार कर लें-कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu 

चलो प्यार कर लें-कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu

वो किधर है?
वो कहाँ है?
वो इधर है
वो यहाँ है
वो एक बूंद है
जो बदलि बन के छाई है
एक कतरा है
जो लहरों में समाई है
वो छलकती है
कभी जाम बनकर
छा जाती है
रूमानी शाम बनकर
ये है मोतियों की माला
टूट कर जब बिखरती है
और भी निखरती है
लबों पर अब निखार भर लें?
चलो हँसी से प्यार कर लें।।

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