चलो तिरंगे को लहरा लें- कविता -मनोहर लाल ‘रत्नम’ सहदेव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Manohar Lal Ratnam Sahdev 

चलो तिरंगे को लहरा लें- कविता -मनोहर लाल ‘रत्नम’ सहदेव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Manohar Lal Ratnam Sahdev

अब सोया जन तंत्र जगा लें,
जन-जन को विश्वास दिला लें।
निर्भय होकर हम अम्बर में,
चलो तिरंगे को लहरा लें॥

चौराहों पैर चीखें क्यों हैं, अर्थ-व्यवस्था मौन दिखती,
मजदूरों की बस्ती में तो, अब रोटी क्यूँ गौण दिखती।
रोटी के बदले में बोटी, छीन रहें हैं ये धन वाले –

गिरगिट जैसे जमाखोर हैं,
आओ इनको नाच-नचा लें।
अब सोया जन तंत्र जगा लें,
जन-जन को विश्वास दिला लें॥

राम राज्य की चढी पताका, इस हिलते से सिंघासन पर,
मोहित, देश के सब नेता हैं, अपने अपने ही आसन पर।
हरियाणा ने रोक लिया है, अब दिल्ली के ही पानी को –

आँखों में जो बचा है पानी,
उसमे डुबकी चलो लगा लें।
अब सोया जन तंत्र जगा लें,
जन-जन को विश्वास दिला लें॥

आतंकी हमले से संसद गदला कर डाला है हमने,
बाहुबली बन अपना चेहरा, उजला कर डाला है हमने।
बाजारों की सारी पूँजी, अब गिरवी है घोटालों में –

घोटाला करने वालों को,
आओ चलकर धुल चटा लें।
अब सोया जन तंत्र जगा लें,
जन-जन को विश्वास दिला लें॥

लाशों पे वोटों की रोटी, खूब सिकी है अब न सिकेगी,
दारू की बोतल पर जनता खूब बिकी है अब न बिकेगी।
अब तो बैल-बकरियों जैसे, संसद के सदस्य बिकते हैं –

देश को कोई बेच न पाये,
आओ मिलकर शोर मचा लें।
अब सोया जन तंत्र जगा लें,
जन-जन को विश्वास दिला लें॥

Leave a Reply