चलो चलें माँ-गीत-कवि प्रदीप-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kavi Pradeep

चलो चलें माँ-गीत-कवि प्रदीप-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kavi Pradeep

चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चले माँ
हो राहें इशारे रेशमी घटाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आज है निमंत्रण सन सन हवाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
घूमना है हमको दूर की दिशाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छांव में
चलो चलें माँ

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