चरन सरनि गुर एक पैडा जाय चल-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चरन सरनि गुर एक पैडा जाय चल-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चरन सरनि गुर एक पैडा जाय चल
सति गुर कोटि पैडा आगे होइ लेत है ।
एक बार सतिगुर मंत्र सिमरन मात्र
सिमरन ताह बारम्बार गुर हेत है ।
भावनी भगति भाय कउडी अग्रभागि राखै
ताह गुर सरब निधान दान देत है ।
सतिगुर दया निधि महमा अगाधि बोधि
नमो नमो नमो नेत नेत नेत है ॥१११॥

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