चंदा मामा बहुत सताते-विकास कुमार गिरि -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vikas Kumar Giri 

चंदा मामा बहुत सताते-विकास कुमार गिरि -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vikas Kumar Giri

चंदा मामा बहुत सताते
कभी दिखते कभी बादलों में छुप जाते
अब और मुझे तडपाओ ना
तुम जल्दी आ जाओ ना

आज छुट्टी का दिन है,
तुम दिन में ही आ जाओ ना
मैं भी किसी को नहीं बताऊँ
तुम भी किसी को मत बताओ ना
तुम जल्दी आ जाओ ना

शाम हो गई इंतजार करते करते
आँखे तरस गए है तेरे दीदार को
अब और इंतज़ार करवाओ ना
तुम जल्दी आ जाओ ना

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