चंचल चन्द्र सूर्य है चंचल-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

चंचल चन्द्र सूर्य है चंचल-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

चंचल चन्द्र सूर्य है चंचल
चपल सभी ग्रह तारा है।
चंचल अनिल, अनल, जल थल, सब
चंचल जैसे पारा है।

जगत प्रगति से अपने चंचल,
मन की चंचल लीला है।
प्रति क्षण प्रकृति चंचला कैसी
यह परिवर्तनशीला है।

अणु-परमाणु, दुःख-सुख चंचल
क्षणिक सभी सुख साधन हैं।
दृश्य सकल नश्वर-परिणामी,
किसको दुख, किसको धन है

क्षणिक सुखों को स्थायी कहना
दुःख-मूल यह भूल महा।
चंचल मानव! क्यों भूला तू,
इस सीटी में सार कहाँ?

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