घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi |-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi |-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है ।
बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है ।

भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारिन-सी,
ये सुब‍हे-फ़रवरी बीमार पत्नी से भी पीली है ।

बग़ावत के कमल खिलते हैं दिल के सूखे दरिया में,
मैं जब भी देखता हूँ आँख बच्चों की पनीली है ।

सुलगते ज़िस्म की गर्मी का फिर एहसास कैसे हो,
मुहब्बत की कहानी अब जली माचिस की तीली है ।

Leave a Reply