घरि नाराइणु सभा नालि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

घरि नाराइणु सभा नालि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

घरि नाराइणु सभा नालि ॥
पूज करे रखै नावालि ॥
कुंगू चंनणु फुल चड़ाए ॥
पैरी पै पै बहुतु मनाए ॥
माणूआ मंगि मंगि पैन्है खाइ ॥
अंधी कमी अंध सजाइ ॥
भुखिआ देइ न मरदिआ रखै ॥
अंधा झगड़ा अंधी सथै ॥१॥1240)॥

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