घटा झुक आई- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

घटा झुक आई- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

घटा, झुक आयी
अचानक तुम यहाँ तक-
इन भवों को भी लोगी चूम?
न जाने!
मगर मन तो ललक से
अभी आया झूम!
मुँद गयी है पलक! अब
अधबीच से ही
तुम न जाना घूम!
ओ घटा लो!
इधर भी आया उमड़ घन
थोड़ा झुको: लो चूम!

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