गड़्ह बगदाद निवायकै मका मदीना सभ निवाया ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

गड़्ह बगदाद निवायकै मका मदीना सभ निवाया ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सिध चौरासीह मंडली खट दरशन पाखंड जणाया ॥
पातालां आकाश लख जित्ती धरती जगत सबाया ॥
जिती नवखंड मेदनी सतनाम का चक्र फिराया ॥
देवदानो राकस दैंत सभ चित्र गुपत सभ चरनी लाया ॥
इन्द्रासन अपच्छरां राग रागनी मंगल गाया ॥
हन्दू मुसलमान निवायआ ॥37॥

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