गैस उड़ रही है तेल जल रहा है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

गैस उड़ रही है तेल जल रहा है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

गैस उड़ रही है तेल जल रहा है।
अब तो खाना पीना खल रहा है।

नमक ने स्वाद खारा कर दिया।
कुक्कर में भी बन्दा गल रहा है।

मोटर गाड़ी पकड़ में नहीं आती।
कहीं आना जाना भी टल रहा है।

दवा खासी कड़वी लगने लगी है।
डॉक्टर फीस परीक्षण छल रहा है।

इतिहास बन रहा है हर अवसर।
जाता रहा आज आ कल रहा है।

अच्छे दिनों के इंतजार में सोहल।
बड़ी बेसब्री से बंदा बहल रहा है।

 

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