गुढ़ी-कविताएँ-गोलेन्द्र पटेल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Golendra Patel

गुढ़ी-कविताएँ-गोलेन्द्र पटेल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Golendra Patel

 

लौनी गेहूँ का हो या धान का
बोझा बाँधने के लिए – गुढ़ी
बूढ़ी ही पुरवाती है
बहू बाँकी से ऐंठती है पुवाल
और पीड़ा उसकी कलाई !

 

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