गुलशन में चहक मुझ से-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

गुलशन में चहक मुझ से-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

गुलशन में चहक मुझ से हज़ारों ने उड़ाई ।
गुलबुन में महक मुझ से ही सारों ने उड़ाई ।
बिजली ने तड़प ज़ौ है सितारों ने उड़ाई ।
जोगी से खटक बन में है ख़ारों ने उड़ाई ।
नशतर कई रख देता हूं, हर मिसरा-ए-तर में ।
कांटा हूं जभी गुलशन-ए-आलम की नज़र में ।

This Post Has One Comment

Leave a Reply