गीत – मैं मदमस्त भँवरा -अनुभव शर्मा-Anubhav Sharma -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

गीत – मैं मदमस्त भँवरा -अनुभव शर्मा-Anubhav Sharma -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

मैं मदमस्त भँवरा,
तू गुलाब की कली।
स्वप्न परी कोई स्वर्ग से,
आ गयी मेरी गली।
मैं मदमस्त………

देखा जब मैंने उसे,
कमाल वो कर गयी।
एक निगाहें अंदाज से,
वार हजारों कर गयी।
मैं मदमस्त………

घूम रहा आकाश मे,
बनकर भँवरा दीवाना।
मिलने को उस कली से,
मचल रहा था परवाना।
मैं मदमस्त……….

फिजाओ मे हवाओं मे,
बात ये उड़ने लगी।
चर्चा गली-गली मे,
सरे आम होने लगी।
मैं मदमस्त………..

उस कली को उसने,
मन मीत अपना मान लिया।
गीत लिखे गजलें लिखी,
प्रीत का स्वर सुना दिया।
मैं मदमस्त…………

महक उठा उपवन सारा,
इन दोनों के संगम से।
प्रेम को परिभाषित किया,
इस अद्भुत जोड़े ने।
मैं मदमस्त………..

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