गीत-भगवान्‌ मुझे, गर्मी का मौसम दो-मेरी कविता मेरे गीत(डोगरी कविता)-पद्मा सचदेव-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Padma Sachdev(अनुवादिका: पद्मा सचदेव) 

गीत-भगवान्‌ मुझे, गर्मी का मौसम दो-मेरी कविता मेरे गीत(डोगरी कविता)-पद्मा सचदेव-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Padma Sachdev(अनुवादिका: पद्मा सचदेव)

भगवान्‌ मुझे, गर्मी का मौसम दो, दु:ख सुख दो
परन्तु मैके से हमेशा मुझे ठंडी हवा आए
सुख का संदेशा आवे

कोई उड़ता पक्षी कभी मेरे घर के ऊपर से गुजरे
या कोई योगी भिक्षा माँगता हुआ आवे
मेरी मां का कोई संदेशा हो तो यही हो
कि तेरे भाई राजी-खुशी हैं ।

ससुराल जाती बेटियों का मन कौन देख सका है
फिर आने की आशा कब है कौन जाने
मन छोटा-छोटा होता है, गले में कुछ फंस गया है
मेरी भाभी को ज़रा सी खरोंच भी न लगे

माँ मुझे पहाड़ों में रहने का चाव है
मुझे पहाड़ों की ठंडी हवा भेज दो
जो साथ में चंपा की महक भी लाए
मुझसे चंबा शहर का सुख संदेशा कहे

गाड़ी दौड़ रही है गलियाँ दूर हो गई हैं
बिना दोष के बेटियाँ परदेसी हो गई हैं
मैं देश विदेश की कूंजड़ी हूँ
मुझे अपने देश की ठंडी हवा आए ।

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