गीत – तुम-अमित सिंह-Amit Singh-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

गीत – तुम-अमित सिंह-Amit Singh-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

दिन के उजालों में भी हो तुम, तुम्हीं हो रातों में
खाबों खयालों में से लेकर, तुम्हीं हो बातों में

जिक्र तेरा न हो जिस में न करता वैसी बातें
तेरे सपने जो ना आते तो न कटती ऐसी रातें
हर पल, हर दिन तुझको चाहा, गुनगुनाया गीतों में
दिन के उजालो में भी हो तुम . .

बचपन में चाहा जब था तुझको, मालूम न था चाहूंगा अब तक,
यूहीं मैं तुझको चाहूंगा निसदिन जाँ है मेरी जाँ ये जब तक,
दो पल की है जीवन अपनी, चाहूँ तेरे संग बीते
सच्चा हो जाए तेरा सपना जो हैं तेरी आँखों में दिन के उजालो में भी हो तुम . .

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