गीत-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

गीत-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

तेरे जाने का ग़म सहूं तो कैसे सहूं।
ऐ हीर तेरे बिन जियूं तो कैसे जियूं।।

दिल की जुदाई सह पाता नहीं हूं।
घुट से हूं जिंदा कह पाता नहीं हूं।
मर जाऊंगा ये तो कहता नहीं
मिट जाऊंगा कह पाता नहीं हूं।।

दिल पर लगा
जो जख्म सहूं तो कैसे सहूं।

तेरे जाने का ग़म सहूं तो कैसे सहूं।
ऐ हीर तेरे बिन जियूं तो कैसे जियूं।।

इस दिल का जख्म भरता नहीं है।
तेरे बिना कोई सिल सकता नहीं है।।
जो मुझे देखने के बहाने ढूंढते थे।।
अब निकलते हैं तो पता चलता नहीं है।।

वादे निभाने की,
कमसे सहूं तो कैसे सहूं।।

तेरे जाने का ग़म सहूं तो कैसे सहूं।
ऐ हीर तेरे बिन जियूं तो कैसे जियूं।।

 

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