गिलहरी का बच्चा-कविता पशु पक्षियों पर-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

गिलहरी का बच्चा-कविता पशु पक्षियों पर-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

लिये फिरता है, यूं तो हर बशर बच्चा गिलहरी का।
हर एक उस्ताद के रहता है, घर बच्चा गिलहरी का।
व लेकिन है हमारा इस क़दर बच्चा गिलहरी का।
दिखा दें हम किसी लड़के को, गर बच्चा गिलहरी का।
तो दम में लोट जाये देख कर बच्च गिलहरी का॥1॥

सफेदी में वह काली धारियां ऐसी रही हैं बन।
कि जैसे गाल पर लड़कों के छूटे जुल्फ़ की नागिन।
किनारीदार पट्टा, जिसमें घुंघरू कर रहे छन-छन।
गले में हंसली, पांवों में कड़े, और नाक में लटकन।
रहा है सरबसर गहने में भर, बच्चा गिलहरी का॥2॥

किसी सरदार के दिल में यह आया एक दिन यारो।
कि देखे घर बुलाकर इश्क़ बाज़ों के हुनर को वो।
कहा उसने कि हां इस ढब से उस्तादों को ले आओ।
सो नौकर उसका सब में ढूंढ़ चुनकर ले गया हमको।
न था हम पास उस दम कुछ मगर बच्चा गिलहरी का॥3॥

वह देखे तो बुरी सूरत, बुरा हाल और फटे कपड़े।
बढ़े दाढ़ी के बाल, और ज़र्द मुंह, आंखों में आंसू से।
बँधी मैली सी पगड़ी सर पे, और टुकड़े अंगरखे के।
वह कपड़े गो फटे थे पर हम अपने फ़न में थे पूरे।
लगा रखते थे ऐसे वक़्त पर बच्चा गिलहरी का॥4॥

जूं ही इतने में हमको इस बुरे अहवाल से देखा।
कहा उसने कि फँसता होगा इनसे किस तरह लड़का।
नज़र से उसकी मैंने जब तो वां इस बात को ताड़ा।
कमर को देख ढूंढ़ी जेब, पगड़ी को टटोला उस जा।
वहीं हमने निकाला ढूंढ कर बच्चा गिलहरी का॥5॥

कहीं बैठा था वां उसका बरस बारह का एक लड़का।
वह गोरा, गुदगुदा, बच्चा परी सा चांद का टुकड़ा।
जूं ही उसने वह बच्चा आह यारो एक नज़र देखा।
वहीं लट्टू हुआ बोला “यही लूंगा यही लूंगा”।
बिठा दो जल्द मेरे हाथ पर बच्चा गिलहरी का॥6॥

यह कहकर बेक़रारी से वह लड़का शौक़ में ग़श हो।
वहीं घबरा के आ पहुंचा जहां हम थे खड़े यारो।
लगा सौ मिन्नतें से मांगने वह, यह तो हमको दो।
वह बाप उसका पुकारा! “हां निकालो जल्दी से उसको।
ग़जब जादू का रखता है असर बच्चा गिलहरी का”॥7॥

पड़ी उल्फ़त है, जब से ऐ ‘नज़ीर’ इस शोख़ बच्चे की।
उड़ाई तब से सैरें हमने क्या-क्या, कुछ तमाशे की।
न ख़्वाहिश लाल की है, अब न पिदड़ी की, न पिद्दे की।
न उल्फ़त कुछ कबूतर की, न तोते की, न बगले की।
हमें काफ़ी है अब तो उम्र भर बच्चा गिलहरी का॥8॥

 

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