गांव की सड़क-मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

गांव की सड़क-मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

ये देस मुख़लिसी-नादार कजकुलाहों का
ये देस बेज़र-ओ-दीनार बादशाहों का
कि जिसकी ख़ाक में कुदरत है कीमीयाई की
ये नायबाने-ख़ुदावन्दे-अरज़ का मसकन
ये नेक पाक बुज़ुर्गों की रूह का मदफ़न
जहां पे चांद सितारों ने जबहासाई की
न जाने कितने ज़मानों से इसका हर रस्ता
मिसाले-ख़ाना-ए-बेख़ानमां था दरबसता
ख़ुशा कि आज बफ़ज़ले-ख़ुदा वो दिन आया
कि दस्त-ए-ग़ैब ने इस घर की दर-कुशाई की
चुने गये हैं सभी ख़ार इसकी राहों से
सुनी गई है बिलआख़िर बरहनापाई की

बेरूत, १९८०

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