ग़ज़ल-3-कविता-परमजीत कौर रीत-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Paramjeet Kaur Reet

ग़ज़ल-3-कविता-परमजीत कौर रीत-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Paramjeet Kaur Reet

 

घर की हो घर से एक मुलाकात चाय पर
आये यों कोई शाम बने बात चाय पर

मसलों का हल या कर सकें बातें जहान की
मिलते हैं कम ही ऐसे तो लम्हात चाय पर

बजते हैं घुँघरू जब भी याँ पुरवा के पाँव में
गाती है गीत यादों की बारात चाय पर

थोड़ी शरारतों या कि नाराज़गी में दोस्त
कितने ही रंग बदलते थे जज़्बात चाय पर

आकर वबा ने इनको भी सबसे जुदा किया
तन्हां से हो गये हैं अब दिन-रात चाय पर

इक रोज़ मिलके बैठे जो आँसू खुशी तो ‘रीत’
होंगे कई जवाब-सवालात चाय पर

 

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