ग़ज़ल-2-कविता-परमजीत कौर रीत-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Paramjeet Kaur Reet

ग़ज़ल-2-कविता-परमजीत कौर रीत-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Paramjeet Kaur Reet

 

ज़रा सा जागने दो इस दीये को
अँधेरा फाँकने दो इस दीये को

दिवारों में वो रस्ता ढूँढ लेगा
दम अपना नापने दो इस दीये को

तमस तो ठेलता आया युगों से
अमा भी हाँकने दो इस दीये को

रँगीली रोशनी प्रतियोगिता में
कभी मत हारने दो इस दीये को

किसी की प्रार्थना का ‘रीत’ दामन
सो मन्नत टाँकने दो इस दीये को

 

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