ग़ज़ल-प्रेम की अगन में जलता है कोई-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

ग़ज़ल-प्रेम की अगन में जलता है कोई-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

प्रेम की अगन में जलता है कोई।
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।

ओंठो पर सिसकियां, आंखों में है पानी।
लिपटीं है वो मुझसे, मेरी है वो रानी।
प्रेम है करती मुझमे है रहती रहता न कोई
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।

प्रेम की अगन में जलता है कोई।
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।

कुछ कहना चाहे, कहती न जानी।
समझूं मैं उसको, दिखाऊ नादानी।
मुझ पर है मरती बातें जो कहती कहता न कोई।
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।

प्रेम की अगन में जलता है कोई।
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।
प्रेम की अगन में जलता है कोई।
आते समय घर से लिपटकर वो रोई।

 

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