गलाई- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

गलाई- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

चाहता हूँ कि मुझे मैं
एक दूसरे साँचे में ढालूँ।
पर भट्ठी तो तुम्हारी है।
इस पुरानी मूर्ति को
गला दोगे?
गलाई क्या लोगे?
-मूर्ति!

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