गर्मी-ए-शौक़े-नज़ारा का असर तो देखो-ज़िन्दां-नामा-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

गर्मी-ए-शौक़े-नज़ारा का असर तो देखो-ज़िन्दां-नामा-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

गर्मी-ए-शौक़े-नज़ारा का असर तो देखो
गुल खिले जाते हैं, वह साय-ए-दर तो देखो

ऐसे-नादाँ भी न थे जाँ से गुज़रने वाले
नासेहो, पन्दगरो, राहगुज़र तो देखो

वह तो वह है, तुम्हें हो जायेगी उल्फत मुझ से
एक नज़र तुम मेरा महबूबे-नज़र तो देखो

वो जो अब चाक गरेबाँ भी नहीं करते हैं
देखनेवालो, कभी उनका जिगर तो देखो

दामने दर्द तो गुलज़ार बना रक्खा है
आओ, एक दिन दिले-पुरखूं का हुनर तो देखो

सुबह की तरह झमकता है शबे-ग़म का उफ़क़
फ़ैज़ ताबिन्दगी-ए-दीदा-ए-तर तो देखो

मिंटगुमरी जेल ४ मारच, १९५५

This Post Has One Comment

Leave a Reply