गरमी-कविता-पद्मा सचदेव-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Padma Sachdev

गरमी-कविता-पद्मा सचदेव-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Padma Sachdev

ठंड गई और गरमी आई
पहले आया फागुन
चिड़ियों ने चढ़ा लिए बंगले
उठ बैठी है रोगिन
खोद रही है मिट्टी कुम्हारिन
जगह बनाए बैठने की
सुंदर सुराही, प्याले और घड़े
घड़ेयाली पर शोभें
ठंडा पानी कुएं में, छेड़खानी करती गरमी
ठंडा पानी पीकर काम पर घर से जाता करमी
शाम को अनारदाने की खुशबू कई घरों से आती
पानी पिलाती सुराहियां बाहर भी भीगी रहतीं
बूंद-बूंद इक-इक पानी की देखो सृष्टि सारी
ओक लगा कर एक सांस में पीते सब संसारी
दिन बढ़ता जैसे बढ़ता कुएं का ठंडा पानी
गरमी में यह बात भला किसे है तुम्हें सुनानी।

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