गद्दी पे पिता बेटे भी -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

गद्दी पे पिता बेटे भी -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

गद्दी पे पिता बेटे भी मसनद के करीं थे ।
दो चांद के टुकड़ों में गुरू माह-ए-मुबीं थे ।
थे नूर से तन पैकर-ए-ख़ाकी नहीं थे ।
शाहज़ादों से शह-शाह से शहज़ादे हसीं थे ।
अम्मामो पि कलग़ी का अजब तुर्रा सज़ा था ।
ੴ साफ़ गुरमुखी में लिखा था ।

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