गजल-गजल में तुम हो बसी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

गजल-गजल में तुम हो बसी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

गजल में तुम हो बसी
मुझमें आकर बस जाओ ।
गजल गजल में तुम हो रमी
मुझमें आकर रम जाओ ।

तुमको गाया, तुमको पाया
गायी गजल वो अपनी है ।
गाकर मेरी गजलों को अब
मेरी गजल तुम बन जाओ ।

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