गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई -सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई -सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

 

गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥
धोती टिका तै जपमाली धानु मलेछां खाई ॥
अंतरि पूजा पड़हि कतेबा संजमु तुरका भाई ॥
छोडीले पाखंडा ॥
नामि लइऐ जाहि तरंदा ॥१॥(471)॥

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